वन विभाग- हजारों पद खाली , सालो से नही हुई भर्ती @mpgurug

पूर्व पीसीसीएफ आरएन सक्सेना कहते हैं कि एक युवा रेंजर के पास कम से कम 200 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र होना चाहिए, तभी जंगलों की सुरक्षा संभव है। शासन स्तर पर सालों से पद नहीं भरे जाने पर अधिकांश अधिकारी ओल्ड एज के हो गए हैं। ऐसे में प्रदेश के वन संकट में हैं। मैदानी अफसरों की कमी से वन माफिया पनप रहे हैं। दरअसल, जंगलों में बीट और परिक्षेत्र में सुरक्षा का जिम्मेवारी रेंजर, डिप्टी रेंजर, वनपाल और वनरक्षकों पर होती है। लेकिन आलम है कि वन महकमे में फील्ड के पदों की संख्या लगातार घटती जा रही है।


अमले में करीब 6 हजार अधिकारियों तथा कर्मचारियों की कमी बनी हुई है। वहीं मुख्यालय स्तर पर अफसरों के पद बढ़ाने के बाद भी वरिष्ठ स्तर पर एक अधिकारी के पास दो-दो प्रभार हैं। मैदानी अमला कम होने से शिकार अवैध कटाई, अवैध उत्खनन जैसे मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। सालों से नहीं हुई भर्ती वन विभाग में सालों से रेंजर (वन क्षेत्रपाल), डिप्टी रेंजर, वनपाल और वनरक्षकों के पदों पर भर्ती नहीं होने के कारण फील्ड व्यवस्था गड़बड़ा गई है। जबकि एसीएफ और आईएफएस के पद लगातार बढ़ रहे हैं। फॉरेस्ट में फील्ड के 25 हजार 766 पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में 19 हजार 933 पदों पर ही अधिकारी व कर्मचारी कार्यरत हैं। और 5 हजार 833 पद खाली पड़े हैं। अब इनमें से कुछ पद भरने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।


वनरक्षकों के 1,000पद भरने शासन से अनुमति मांगी है रेंज अफसर के 105 पद एमपीपीएससी के माध्यम से भरे जाने हैं। कोरोना के कारण अप्रैल में होने वाली प्रतियोगी परीक्षा अगस्त में होगी। वहीं वन रक्षक के एक हजार पद भरने के लिए शासन से अनुमति मांगी है।
महेन्द्र सिंह धाकड़, एपीसीसीएफ प्रशासन एक वन मुख्यालय
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